UP Outsourcing Corporation 2025: उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन, वेतन, चयन प्रक्रिया और पूरी जानकारी | up-outsourcing-corporation-2025-upcos-salary-recruitment

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UP Outsourcing Corporation 2025: उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन, वेतन, चयन प्रक्रिया और पूरी जानकारी | up-outsourcing-corporation-2025-upcos-salary-recruitment

UP Outsourcing Corporation 2025: उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन, वेतन, चयन प्रक्रिया और पूरी जानकारी | up-outsourcing-corporation-2025-upcos-salary-recruitment


उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) को लेकर जारी शासनादेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों, पारिश्रमिक, EPF, ESIC, आरक्षण, भर्ती/तैनाती प्रक्रिया और आउटसोर्सिंग एजेंसियों की निगरानी से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। यह शासनादेश 19 सितंबर 2025 को जारी किया गया है। शासनादेश की संख्या 3/2025/205/बीस-13-वि-2025 है।


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UP Outsourcing Corporation क्या है?

उत्तर प्रदेश सरकार ने Companies Act, 2013 के Section-8 के अंतर्गत एक Non-Profit Organization के रूप में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन करने का निर्णय लिया है।


इस निगम का मुख्य उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को अधिक पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराना तथा आउटसोर्सिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण और निगरानी स्थापित करना है।


UPCOS का मुख्य Vision

निगम का विजन आउटसोर्स कर्मचारियों को पूरा पारिश्रमिक और अन्य सुविधाएं समय से उपलब्ध कराना तथा पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है। साथ ही आरक्षण व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करना भी इसका उद्देश्य है।


UP Outsourcing Corporation के मुख्य उद्देश्य

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:


- Skilled, Semi-Skilled और Unskilled Manpower उपलब्ध कराना।

- विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थाओं में आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं उपलब्ध कराना।

- आउटसोर्सिंग एजेंसियों की निगरानी करना।

- कर्मचारियों को समय से पारिश्रमिक दिलाना।

- EPF और ESIC की व्यवस्था सुनिश्चित करना।

- आरक्षण नियमों का पालन सुनिश्चित करना।

- कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना।

- आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कामकाज के लिए मानक निर्धारित करना।


UP Outsourcing Employees को क्या-क्या लाभ मिलेंगे?

शासनादेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं प्रस्तावित की गई हैं।


1. हर महीने समय से वेतन/पारिश्रमिक

आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा कर्मचारियों को प्रत्येक माह की 01 से 05 तारीख तक पारिश्रमिक उपलब्ध कराया जाना है।

2. EPF और ESIC

आउटसोर्स कर्मचारियों के EPF तथा ESIC खाते खुलवाकर धनराशि जमा कराना सुनिश्चित किया जाएगा।

कर्मचारियों को EPF, ESIC और बैंक से संबंधित अनुमन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।


3. कर्मचारियों को Training

कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था भी शासनादेश में है।


4. Reservation

SC, ST, OBC, दिव्यांगजन, महिलाओं, EWS, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित तथा भूतपूर्व सैनिकों आदि के लिए नियमानुसार आरक्षण सुनिश्चित करने की बात कही गई है।


Outsourcing Agency Selection Process

आउटसोर्सिंग एजेंसियों का चयन निगम द्वारा GeM Portal के माध्यम से किया जाएगा।

एजेंसी का Empanelment न्यूनतम 3 वर्ष अथवा कार्य की आवश्यकता समाप्त होने तक, जो पहले हो, के लिए किया जाएगा।

निगम, संबंधित विभाग/संस्था और आउटसोर्सिंग एजेंसी के बीच Tripartite Agreement के माध्यम से प्रक्रिया संचालित की जाएगी।


यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि शासनादेश के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारी का Employer आउटसोर्सिंग एजेंसी होगी, जबकि निगम एजेंसियों के माध्यम से विभागों को सेवाएं उपलब्ध कराएगा।


Outsourcing Agency की जिम्मेदारी

आउटसोर्सिंग एजेंसी के लिए भी शासनादेश में कई जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

एजेंसी को प्रत्येक महीने की 05 तारीख तक कर्मचारी के खाते में पारिश्रमिक देना होगा।

नए और पुराने उन कर्मचारियों के EPF एवं ESIC खाते खुलवाना भी एजेंसी की जिम्मेदारी होगी, जिनका खाता पहले से नहीं खुला है।


इसकी पुष्टि से संबंधित प्रमाण-पत्र प्रत्येक माह की 10 तारीख से पहले निगम को प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद निगम द्वारा कमीशन की धनराशि एजेंसी को दी जाएगी।


UP Outsourcing Recruitment Process कैसे होगा?

आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं प्राप्त करने की प्रक्रिया UPCOS की निगरानी में निर्धारित SOP (Standard Operating Procedure) के अनुसार होगी।


संबंधित विभाग/संस्था द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य अहर्ताओं के साथ-साथ लागू आरक्षण नियमों का पालन आउटसोर्सिंग एजेंसी को करना होगा।


Candidate Selection में कितने उम्मीदवार बुलाए जाएंगे?

शासनादेश में उम्मीदवारों के चयन के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी गई है।

यदि विभाग को 1 कर्मचारी की आवश्यकता है तो पोर्टल से 5 आवेदकों में से सेवा प्राप्त की जाएगी।

यदि 2 या उससे अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता है तो मांग की संख्या के 3 गुना, लेकिन न्यूनतम 10 आवेदनकर्ताओं में से चयन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।


Outsourcing Employee को मनमाने तरीके से हटाया नहीं जा सकेगा

शासनादेश में कहा गया है कि आउटसोर्स कर्मचारी को आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा स्वयं से बदला या हटाया नहीं जा सकता।

अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी स्थिति में संबंधित विभाग/संस्था और निगम की सहमति के बाद ही कर्मचारी को हटाया जा सकेगा।


Outsourcing Selection में किन बातों के आधार पर चयन होगा?

उम्मीदवारों की सेवाएं प्राप्त करने की प्रक्रिया में निम्न आधारों को ध्यान में रखा जाएगा:

- परिवार की आय

- उम्मीदवार की आयु

- पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता

- लिखित परीक्षा के अंक

- साक्षात्कार के अंक

- स्थानीय निवास


यह प्रक्रिया विभाग और निगम की निगरानी में की जाएगी।


Grade-3 और Grade-4 में Interview नहीं


शासनादेश के अनुसार श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों के लिए कोई साक्षात्कार नहीं होगा।

विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को प्राथमिकता

विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को वरीयता प्रदान करने का प्रावधान है।

वरीयता क्रम में:

1. विधवा महिला

2. तलाकशुदा महिला

3. परित्यक्ता महिला

को प्राथमिकता दी जाएगी।


Outsourcing Selection में 100 Marks का Formula

शासनादेश में सेवाओं की प्राप्ति के लिए अधिकतम 100 अंक निर्धारित किए गए हैं।


चयन का आधार| अधिकतम अंक

निर्धारित योग्यता के अतिरिक्त/अधिमानी योग्यता| 25 अंक

विधवा/तलाकशुदा/परित्यक्ता महिला| 10 अंक

लिखित परीक्षा| 50 अंक

स्थानीय निवास| 15 अंक

कुल| 100 अंक


यह अंक निर्धारण शासनादेश में दिए गए मापदंडों के अनुसार है।


Local Candidate को 15 Marks


यदि आवेदक संबंधित जनपद का स्थानीय निवासी है तो उसे 15 अंक दिए जाने का प्रावधान है।

कर्मचारी के निगम में Migration के बाद विभाग और कर्मचारी को एक Unique Code भी आवंटित किया जाएगा।


Monthly Attendance का नियम

आउटसोर्स कर्मचारियों की मासिक उपस्थिति से संबंधित जानकारी संबंधित विभाग के DDO द्वारा उपलब्ध कराई गई वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी।

उपस्थिति की गणना पिछले माह की 30 तारीख से चालू माह की 29 तारीख तक की जाएगी।


UP Outsourcing Employees की 4 Categories

शासनादेश में आउटसोर्स कर्मचारियों को शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और पारिश्रमिक के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है।


Category 1 Outsourcing Salary

श्रेणी-1 में विभिन्न उच्च योग्यता वाली सेवाओं के लिए न्यूनतम पारिश्रमिक ₹40,000 प्रति माह निर्धारित किया गया है।

इस श्रेणी में उदाहरण के तौर पर:

- चिकित्सा सेवाएं — MBBS — ₹40,000

- अभियंत्रण सेवाएं — B.Tech — ₹40,000

- व्याख्यान सेवाएं — संबंधित विषय में Post Graduation — ₹40,000

- परियोजना प्रबंधन सेवाएं — संबंधित निर्धारित योग्यता — ₹40,000

- लेखा सेवाएं — M.Com/अनुभव/CA — ₹40,000

- वास्तुविद सेवाएं — B.Arch — ₹40,000

- अनुसंधान सेवाएं — निर्धारित Post Graduation — ₹40,000


श्रेणी-1 की विस्तृत सूची शासनादेश के संलग्नक में दी गई है।


Category 2 Outsourcing Salary


श्रेणी-2 में विभिन्न सेवाओं के लिए न्यूनतम पारिश्रमिक ₹25,000 प्रति माह निर्धारित है।

इसमें कार्यालयीय सेवाएं, आशुलिपिकीय सेवाएं, लेखा, डाटा प्रोसेसिंग, अनुवादकीय, कल्याण सेवाएं, कला शिक्षण, शारीरिक प्रशिक्षण और शिक्षण सेवाएं आदि शामिल हैं।


उदाहरण:

- Office Services — ₹25,000

- Stenographic Services — ₹25,000

- Accounts Services — ₹25,000

- Data Processing Services — ₹25,000

- Welfare Services — ₹25,000

- Art Teaching Services — ₹25,000

- Physical Training Services — ₹25,000

- Teaching Services — ₹25,000


Category 3 Outsourcing Salary

श्रेणी-3 के लिए शासनादेश में विभिन्न सेवाओं का न्यूनतम पारिश्रमिक ₹22,000 प्रति माह निर्धारित किया गया है।


इसमें उदाहरण के तौर पर:

- कार्यालयीय सेवाएं

- आशुलिपिकीय सेवाएं

- टंकण सेवाएं

- दूरसंचार सेवाएं

- भंडार संबंधी सेवाएं

- फोटोग्राफी सेवाएं

- डाटा प्रोसेसिंग

- पुस्तकालयीय सेवाएं

- इलेक्ट्रीशियन सेवाएं

- यांत्रिक सेवाएं

- फिटर सेवाएं

- प्रयोगशाला सेवाएं

- पैरा मेडिकल सेवाएं

- पर्यवेक्षणीय सेवाएं

- प्रबंधकीय सेवाएं

शामिल हैं।


Category 4 Outsourcing Salary

श्रेणी-4 में हाईस्कूल या जूनियर हाईस्कूल योग्यता वाली विभिन्न सेवाओं के लिए न्यूनतम पारिश्रमिक ₹20,000 प्रति माह निर्धारित किया गया है।


इस श्रेणी में:

- कार्यालयीय सेवाएं

- लिफ्ट ऑपरेटर

- प्रयोगशाला सेवाएं

- अभिलेख सेवाएं

- कार्यालयीय अधीनस्थ सेवाएं

- भंडारण सेवाएं

- विशिष्ट सेवाएं

- अति विशिष्ट सेवाएं

आदि शामिल हैं।


विशिष्ट सेवाओं में डाक, रंगरोगन, खानपान, बागवानी और श्रम सेवाएं जैसे कार्य उदाहरणस्वरूप बताए गए हैं। अति विशिष्ट सेवाओं में यांत्रिक, विद्युत, सैनिटेशन, पंपिंग, फायर और सुरक्षा सेवाएं आदि उदाहरण दिए गए हैं।


क्या Outsourcing Salary बढ़ सकती है?

शासनादेश में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि निर्धारित पारिश्रमिक को न्यूनतम सीमा/आधार मूल्य के रूप में प्रस्तावित किया गया है।

यदि किसी विभाग द्वारा इससे अधिक पारिश्रमिक पहले से दिया जा रहा है तो वह जारी रहेगा।

साथ ही सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम पारिश्रमिक को आधार मूल्य मानकर समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा आउटसोर्स्ड मैनपावर के पारिश्रमिक में वृद्धि की जाएगी।


इसका मतलब यह है कि शासनादेश में दिए गए ₹20,000, ₹22,000, ₹25,000 और ₹40,000 को न्यूनतम पारिश्रमिक के रूप में समझा जाना चाहिए।


क्या Outsourcing कर्मचारी Regular हो जाएंगे?

नहीं। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं सृजित/नियमित पदों के विरुद्ध नहीं ली जा रही हैं और यह नियमित सेवाओं का विकल्प नहीं होंगी।

इसलिए इस शासनादेश को सीधे तौर पर Regularization का आदेश नहीं माना जा सकता।


Outsourcing Corporation का Organizational Structure

UPCOS की संगठनात्मक संरचना में मुख्य रूप से:

1. Board of Directors

2. Advisory Committee

3. Corporation Headquarters

4. शासन/निदेशालय/नगर निगम/स्थानीय निकाय एवं अन्य संस्थाओं की Monitoring Committee

5. मंडल स्तरीय Monitoring Committee

6. जिला स्तरीय Monitoring Committee

7. स्थानीय स्तरीय Monitoring Committee

का प्रावधान है।


Board of Directors में कौन-कौन होंगे?

बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में अध्यक्ष के रूप में मुख्य सचिव तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल करने की व्यवस्था है।


इनमें सचिवालय प्रशासन, वित्त, कार्मिक, न्याय और श्रम विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं।


Board of Directors निगम की रणनीतिक दिशा, नीतियों, प्रबंधन, संचालन, कानून एवं नियमों के अनुपालन तथा बजट आदि से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी करेगा।


Advisory Committee

शासनादेश में 6 सदस्यों की एक Advisory Committee गठित करने का प्रस्ताव है।

इसमें:

- Human Resource क्षेत्र के 2 विशेषज्ञ

- 2 उद्यमी

- 1 Technocrat

- 1 Strategist

को नामित किया जाना प्रस्तावित है। यह समिति निगम के कार्यों तथा आउटसोर्स कर्मचारियों के Welfare से संबंधित मामलों में Board को सलाह देगी।


District Level Outsourcing Monitoring Committee

जिला स्तर पर आउटसोर्स कर्मचारियों की योग्यता/अर्हता सत्यापन और Monitoring के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का प्रावधान है।

इसमें:

- जिलाधिकारी — अध्यक्ष

- मुख्य विकास अधिकारी — सदस्य/समन्वयक

- जिला सेवायोजन अधिकारी — सह-समन्वयक

- संबंधित विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी — सदस्य

शामिल होंगे।


Outsourcing Employees के लिए महत्वपूर्ण बातें

इस शासनादेश के आधार पर आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए मुख्य बातें इस प्रकार हैं:


1. वेतन/पारिश्रमिक समय से देने की व्यवस्था।

2. EPF और ESIC खाते एवं जमा राशि सुनिश्चित करने का प्रावधान।

3. आरक्षण नियमों के अनुपालन की व्यवस्था।

4. चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता।

5. स्थानीय निवास के लिए 15 अंक।

6. अतिरिक्त/अधिमानी योग्यता के लिए 25 अंक।

7. लिखित परीक्षा के लिए अधिकतम 50 अंक।

8. विधवा/तलाकशुदा/परित्यक्ता महिला के लिए 10 अंक।

9. Grade-3 और Grade-4 में Interview नहीं।

10. एजेंसी द्वारा कर्मचारी को मनमाने ढंग से हटाने पर रोक।

11. न्यूनतम पारिश्रमिक की चार श्रेणियां निर्धारित।

12. विभाग द्वारा पहले से अधिक पारिश्रमिक दिए जाने पर वह जारी रहेगा।


महत्वपूर्ण निष्कर्ष | Important Conclusion

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के बीच एक अधिक Transparent, Regulated and Monitored System तैयार करना है।

इस शासनादेश में कर्मचारियों के लिए पारिश्रमिक, EPF, ESIC, आरक्षण, चयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण और शिकायत/समस्या समाधान से जुड़ी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शासनादेश में चार श्रेणियों के लिए न्यूनतम पारिश्रमिक का प्रावधान है:


Category 1 — ₹40,000


Category 2 — ₹25,000


Category 3 — ₹22,000


Category 4 — ₹20,000


लेकिन इन राशियों को शासनादेश में न्यूनतम पारिश्रमिक के रूप में प्रस्तावित किया गया है और यदि किसी विभाग में इससे अधिक पारिश्रमिक दिया जा रहा है तो उसे जारी रखने की बात कही गई है।


Disclaimer

यह लेख उपलब्ध कराए गए उत्तर प्रदेश शासन के शासनादेश के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें शासनादेश में दिए गए प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया गया है। किसी भर्ती, नियुक्ति, पारिश्रमिक या अन्य कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग द्वारा जारी नवीनतम आदेश/अधिसूचना को भी अवश्य देखें।



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